विराम का रहस्य


विराम का रहस्य

विराम कोई अंत नहीं,  
यह तो श्वास का गहन क्षण है।  
जहाँ शब्द थमकर सुनते हैं,  
मौन की अनकही धुन है।  

हर ठहराव में छिपा है,  
एक नया आरंभ का संकेत।  
जैसे रात्रि की नीरवता में,  
उगता है सूरज का संगीत।  

विराम सिखाता है धैर्य,  
कि गति ही सब कुछ नहीं।  
कभी ठहरना भी ज़रूरी है,  
ताकि मंज़िल दिखे सही।  

यह रहस्य है जीवन का,  
कि रुकना भी यात्रा है।  
हर विराम में छिपा हुआ,  
एक नया विस्तार है।  

---


Comments

Popular posts from this blog

सफलता: छोटे प्रयासों का बड़ा परिणाम

“हर विराम में छिपा है एक नया आरंभ।”

Awake, Arise, and Conquer: Why Swami Vivekananda is the Ultimate Youth Icon Today