असफलता या विरह के बाद पुनः आरंभ

💔 असफलता या विरह के बाद पुनः आरंभ


दिल टूटता है,  

सपने बिखरते हैं,  

और शब्दों से लंबा मौन ठहर जाता है।  


पर हर मौन अंत नहीं होता—  

वह एक द्वार है,  

एक विराम जो फुसफुसाता है:  

"हर विराम में छिपा है एक नया आरंभ।"  


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आँसुओं को बहने दो,  

जैसे वर्षा बीते कल की धूल धो देती है।  

दर्द को साँस लेने दो,  

क्योंकि पीड़ा भी अपनी कविता रखती है।  


असफलता शिलालेख नहीं,  

बल्कि संकेत है—  

जो तुम्हें दृढ़ता की ओर ले जाता है।  

विरह शून्यता नहीं,  

बल्कि प्रमाण है कि तुम कितनी गहराई से प्रेम कर सकते हो।  


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धीरे-धीरे पुनः आरंभ करो।  

भोर में एक मंत्र के साथ:  

"मैं खंडहरों से भी उठता हूँ।"  

संध्या में कलम के साथ:  

दुःख को गीत में बदलते हुए।  

बीच के विरामों में:  

जहाँ साँस प्रार्थना बन जाती है,  

और स्थिरता शक्ति।  


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आगे बढ़ो, जल्दबाज़ी में नहीं,  

बल्कि अपने प्रति करुणा के साथ।  

एक छोटा-सा आत्म-देखभाल का कार्य,  

एक नया सपना जो हानि की मिट्टी में बोया गया।  

दिल की दरारें दोष नहीं हैं—  

वे प्रकाश के लिए द्वार हैं।  


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और जब संसार फिर से play दबाएगा,  

तुम स्वयं को उस लय पर नाचते पाओगे  

जिसे तुम खोया हुआ समझते थे।  

असफलता ने तुम्हें दृढ़ता सिखाई होगी।  

विरह ने तुम्हें कोमलता सिखाई होगी।  

और दोनों ने मिलकर तुम्हें नवजीवन सिखाया होगा।  


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