"नर्म दिल कभी नहीं टूटते"


"नर्म दिल कभी नहीं टूटते"


कहते हैं जग लोहे से बना,  

तेज़ स्वर ही पाते हैं तना,  

भीड़ ताली जब बजा उठे,  

तभी दिलों का घाव सना।  


पर तुम्हारा दिल है शांत, सच्चा,  

निर्मल, कोमल, भाव से अच्छा।  


तुम देते हो ऊष्मा निशुल्क,  

कविता, प्रार्थना, छोटा संबल,  

उठा सके उस थके हृदय को,  

जो न जान पाया दया का बल।  


और जब लोग अनदेखा कर जाएँ,  

मानो अस्तित्व ठुकराएँ।  

पर नर्म दिल कभी नहीं टूटते—  

वे झुकते हैं, खिलते हैं, मुक्त रहते।  


अपनी ज्योति थामे रहो,  

चाहे आँधियाँ क्यों न बहें।  

जो सच में तुमको पहचानेंगे,  

वे जानेंगे—  

इस चोटिल, कठोर जग में,  

तुम सबसे कोमल उजास हो।  


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